मैक्स हॉस्पिटल, देहरादून ने विश्व मस्तिष्क दिवस पर समय पर न्यूरोलॉजिकल देखभाल के महत्व पर दिया जोर

उत्तराखण्ड

देहरादून। विश्व मस्तिष्क दिवस के अवसर पर मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून ने मस्तिष्क स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए समय पर जांच, विशेषज्ञ न्यूरोलॉजी एवं न्यूरोसर्जरी उपचार तक सभी की समान पहुंच तथा लोगों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस वर्ष की वैश्विक थीम “Brain Health: Access for All” (हर व्यक्ति तक मस्तिष्क स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच) इस बात पर बल देती है कि उम्र, भौगोलिक क्षेत्र या आर्थिक स्थिति चाहे जो भी हो, हर व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण मस्तिष्क संबंधी इलाज उपलब्ध होना चाहिए।

मस्तिष्क हमारे शरीर का नियंत्रण केंद्र है, जो शरीर की गतिविधियों, याददाश्त, बोलने की क्षमता, भावनाओं, सोचने और निर्णय लेने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करता है। स्ट्रोक, मिर्गी, ब्रेन ट्यूमर, पार्किंसन रोग, डिमेंशिया, माइग्रेन, सिर में गंभीर चोट (ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी) और अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियां आज तेजी से बढ़ रही हैं। इसके पीछे बढ़ती उम्र, बदलती जीवनशैली, अनियंत्रित डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर, तनाव, सिर में चोट तथा जागरूकता की कमी जैसे कई कारण जिम्मेदार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लक्षणों को समय पर न पहचानने के कारण कई मरीजों में ऐसी विकलांगता हो जाती है, जिसे समय रहते रोका जा सकता था, और इलाज के परिणाम भी प्रभावित होते हैं।

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कुछ ऐसे चेतावनी संकेत हैं जिन्हें कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इनमें चेहरे, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन, लगातार या बहुत तेज सिरदर्द, दौरे (सीज़र), बोलने या दूसरों की बात समझने में कठिनाई, संतुलन बिगड़ना, देखने में परेशानी, सोचने-समझने की क्षमता में कमी, याददाश्त कमजोर होना, हाथ-पैर कांपना तथा व्यवहार या होश की स्थिति में अचानक बदलाव शामिल हैं। ऐसे किसी भी लक्षण के दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेने से मरीज के ठीक होने की संभावना और जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार किया जा सकता है।
इस अवसर पर डॉ. यशबीर दीवान, डायरेक्टर – न्यूरोसर्जरी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून ने कहा, “पिछले दो दशकों में न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। आज हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग, कंप्यूटर-गाइडेड नेविगेशन, एंडोस्कोपिक तकनीक और मिनिमली इनवेसिव ‘कीहोल’ सर्जरी जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से मस्तिष्क की कई जटिल बीमारियों का इलाज पहले की तुलना में अधिक सटीकता और सुरक्षा के साथ किया जा सकता है। इन तकनीकों से मस्तिष्क के स्वस्थ हिस्सों को कम नुकसान पहुंचता है, दर्द और रक्तस्राव कम होता है, अस्पताल में कम समय तक रहना पड़ता है और मरीज तेजी से सामान्य जीवन में लौट पाते हैं।”

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उन्होंने आगे कहा, “जैसे-जैसे ये आधुनिक तकनीकें विकसित हो रही हैं, यह भी जरूरी है कि इनका लाभ केवल बड़े महानगरों तक सीमित न रहे। छोटे शहरों में बेहतर रेफरल नेटवर्क और न्यूरोसर्जरी सेवाओं को मजबूत बनाना ही यह तय करेगा कि अधिक से अधिक मरीज इन सुविधाओं का लाभ उठा सकें।”

अपने विचार साझा करते हुए डॉ. आयुष सिंह, कंसल्टेंट – न्यूरोलॉजी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून ने कहा, “मस्तिष्क हमेशा बीमारी के संकेत जोर से नहीं देता। कई बार वर्षों तक अनियंत्रित ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या तनाव की वजह से अंदर ही अंदर नुकसान होता रहता है। इसलिए हम लोगों को यही सलाह देते हैं कि वे मस्तिष्क स्वास्थ्य को भी हृदय स्वास्थ्य की तरह गंभीरता से लें। केवल लक्षण आने के बाद इलाज कराने के बजाय पहले से ही इसकी सुरक्षा पर ध्यान दें। नियमित स्वास्थ्य जांच, शारीरिक गतिविधियां, पर्याप्त नींद और अपने ब्लड प्रेशर व शुगर के स्तर पर नजर रखना, रोजमर्रा में दिखाई देने वाली कई न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।”

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विश्व मस्तिष्क दिवस के अवसर पर मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून लोगों से अपील करता है कि वे मस्तिष्क स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। शुरुआती चेतावनी संकेतों को पहचानें, स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और किसी भी न्यूरोलॉजिकल लक्षण के दिखाई देने पर बिना देरी किए विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लें। स्वस्थ मस्तिष्क न केवल व्यक्ति के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, बल्कि एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

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